माल में घुसते ही कुछ बच्चे केरल में आये बाढ़ के लिए राहत माँग रहे थे. सबके हाथों में तख्तियाँ थी, उसपर लिखा हुआ था कि केरल फ्लाड़ के लिए कुछ सहायत करें. मैं उधर से ही गुजर रहा था. सहायता माँगने वाले विद्यार्थी मेरी तरफ भी डब्बा बढ़ा दिये. वे सभी कुछ रूपये के लिए आग्रह कर रहे थे. मैं रूक गया और एक-एक बच्चे को बड़े ही गौर से देखा, और सोचने लगा ये है मेरे आने वाली देश के कर्णधार इन्हीं के कंधों पर देश का पूरा भार रहेगा. इन बच्चों की उम्र ज्यादा न थी. यही कोई पंद्रह से बीस के आस-पास होगी. मैं इन बच्चों से पूछ ही लिया, बच्चों आपको पता है कि बाढ़ क्यों आता है. इन बच्चों की भीड़ में एक बच्चा तपाक से बोलाः सरजी पेड़, जंगल लोग काट रहें है न इसी लिए ये आपदा आ रही है. मतलब ये था कि बह बच्चा जान रहा था कि पर्यावरण को यदि हानि पहुँचाई जाती है तो इसका परिणाम आपदा होती है.
मैं इन बच्चों को शिक्षा देने के लिए मैनें बोलाः आप डिझास्टर मैनेजमैंट के बारे में कुछ सुना है. इन सारे बच्चों में किसी को भी यह पता न था. मैं बोला कि यह दो तरह के होते है. प्री डिझास्टर मैनेजमैंट और आफ्टर डिझास्टर मैनेजमैंट. प्री डिझास्टर में हम बाढ़ या आपदा आने से पहले हम किस तरह से बचाव करेंगे यह सीखाया जाता है. जैसे बरसात आने से पहले हम दवाईया, कुछ खाने के सूखा सामान, पीने का स्वच्छ पानी, अपना घर ऊँचा स्थान पर बनाना, सड़के, रेल को भी उँची जगह पर निर्माण करना. मतलब की हम यदि पहले से ही सतर्क है तो बाढ़ आने पर हमें बहुत ही कम नुकसान होगा.
हम कंक्रीट के जंगल बनाते जा रहे है पर हम घरों से निकलने वाला गंदा पानी के लिए नाली प्रबंधन अच्छी तरह से नहीं कर पा रहे है. पोखरे, तालाब, छोटी- छोटी नदियों का जमीन दोहन करके उसमें घर बना लिए है जिससे कि नदियाँ और सकरी हो गयी है. नदी में थोड़ा सा ज्यादा पानी होने से नदी संम्भाल नहीं पाती है और परिणाम आपके सामने है उत्तराखंड़ और ताजा केरला.
मेरे देश में जितना ध्यान आफ्टर डिझास्टर मैनेजमेंट को दिया जाता है उस तरह से प्री डिझास्टर मैनेजमेंट को नहीं दिया जाता. जब आग लगती है तब हम कुँआ खोदते है तब तक तो बहुत देर हो जाती है. सैकड़ो लोगों की जान लेकर ये आपदा जाती है.
कुछ बहुत ही ज्यादा विद्वान लोग यहाँ तक तर्क लगा रहे है कि शबरी माला मंदिर अपवित्र कर दिया गया है जिसके कारण देवी नाराज हो गयी है और यह प्रलय भेज दिया है. आज के जमाने में भी इस तरह की बाते सुनकर बहुत ही बड़ा अफसोस होता है और लगता है कि यह कभी खत्म नहीं होने वाला है.
मैं मन ही मन सोच रहा था कि ये मासूम बच्चे यह तो ये भी नहीं जानते है कि जो सरकार राहत सामाग्री देती है तो कुछ बुरे स्वभाव के लोग उसमें भी भ्रण्टाचार कर देते है. मतलब राहत में भी लूट हो जाती है तो आपही बताईये इस देश को कोई कल्याण कर सकता है क्या?
मैं माल से लौटते बहुत ही प्रसन्न था कि चलो बच्चे इतना तो प्रयास कर ही रहे है जिससे कि केरला के लिए कुछ तो राहत पहुँचा सकते है. ये केरला के गहरे जख्म पर कुछ तो मरहम लगा रहे है. इस बुरे समाज में एक अच्छा काम कर रहे है जिससे कि देश को बहुत आगे ले जायेंगे ये कर्णधार.
दिनांकः 20.08.2018, सिलीगुड़ी, गिरधारी राम.
शनिवार, 8 सितंबर 2018
उपचार
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