शनिवार, 8 सितंबर 2018

वोट

पिछले चुनाव की बात है झुनिया ने साड़ी ग्राम प्रधान के सामने ही फेक दिया था। ग्राम प्रधान ने वोट के बदले में साड़ी देने का प्रयास किया था। फिर दोवारा किसी की भी हिम्मत न हुई कि झुनिया को मना ले।
वोट की गिनती में एक बार फिर वर्तमान ग्राम प्रधान की जीत हुई। चुनाव खत्म हो गया। चुनाव में साड़ी न लेने का परिणाम झुनिया को भुगतना पड़ा। उसका आज तक लाल राशन कार्ड नहीं बना। लाल राशन कार्ड की सूची में ग्राम प्रधान के छोटे भाई का भी नाम था जो कि काफी समृद्ध था पर झुनिया का नही बन पाया जो कि सचमुच इसकी हकदार थी।
जिला पंचायत के चुनाव नजदीक आ रहे थे। रात का समय था करीब बीस पच्चीस की संख्या में झुनिया के दरवाजे पर लोग पहुँच गये। दो हजार रूपये जिसमें पाँच पाँच सौ के चार नोट झुनिया के हाथ में पकड़ाकर प्रत्यासी नें पैर छूकर प्रणाम किया। झुनिया इस बार कुछ न बोली। वह इस बार भी रूपये को फेकना चाह रही थी पर एक अनजाना डर के मारे कुछ कर न सकी। वोट के बदले उपहार न लेने का परिणाम पहले ही भुगत चुकी थी।
जब सुबह वोट देकर आयी तो कुंठाग्रसित मन में पाप का बोझ लिए संदूकची खोली। वह गौर से देख रही थी। बस एक ही नोट असली है बाकी तीन पाँच सौ के नोट नकली है। झुनिया इस बार ठगी जा चुकी थी।
झुनिया एक गरीब विधवा थी। पति के मरे पाँच साल गुजर गये थे। एक औलाद भी हुआ तो किसी काम का न था। गरीब माँ को छोड़कर जो दिल्ली गया तो वह कभी गाँव का रूख न किया। अब तो उसका कोई सहारा न था। दूसरो के खेतों में मजदूरी करके झुनिया गुजारा करती।
चुनाव आयोग के लाख प्रयास के वावजूद वोट अपनी सही जगह पर नहीं जा रहा था। कुछ बुरे स्वभाव के लोग डरा धमकाकर अपनी रोटी सेंक रहे थे।
विधायक के चुनाव थे। इस बार भी काफी लोगो ने प्रयास किया कि झुनिया को रिझाने के लिए। झुनिया ने एक तरकीब सोची। वह सभी से कहती भैया! मैं वोट आपको ही दूँगी पर आपसे कुछ न लूँगी। लोग पूछतेः आखिर क्या गारंटी है कि तू हमें ही वोट दोगी? वह कहती तू आकर देख लेना मैं किसको वोट देती हूँ।
चुनाव आयोग की सख्ती थी। कोई भी वोट के दलाल पोलिंग बूथ पर गलत नहीं कर पा रहा थे। झुनिया नें मौका देखकर अपना वोट अपनी पसंद के उम्मीदवार को दे दी। झुनिया के मन में एक अलग तरह शांति थी। ।
परिणाम आ गया। झुनिया के पसंद का उम्मीदवार ही इस विधायक चुनाव में जीता था। उसने पहली बार अपनी वोट की ताकत को पहचानी थी। झुनिया को इस बार संतोष था। झुनिया सोच रही थी कि यदि इसी तरह चुनाव होते रहे तब ही इमानदार प्रत्यासी आपके वोट के द्वारा चुन कर आयेगा। सरकार के सभी योजनाओं का लाभ एक दूर गाँव में आम आदमी तक पहुँच पायेगा तभी सचमुच देश का विकाश होगा। 
दिनांकः 17-2-2017

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