अभी इसी रविवार को मै और मेरा एक मित्र चौधरीजी अपने शहर के माल सिटी सेंटर गये हुए थे। पूर माल को घूमने के उपरांत आखिरकार हम लोग एक दुकान में घुस गये। चौधरीजी ने एक कपड़े का सेट तथा और भी कुछ जरूरत का समान खरीदा। जब वह काउंटर पर बिल को चुकाने लगे तो बिल बनाने वाला ने बड़े आग्रह और बड़े ही जरूरत से बोलाः सरजी आप अपना मोबाईल नम्बर बताये? चौधरीजी के पास मोबाईल नम्बर तो था पर उस दुकान पर देना नहीं चाह रहे थे क्योंकि मोबाईल नम्बर देने का नतीजा वह आज तक भुगत रहे है। उनके मोबाईल पर अनचाहा ऑफर की सूचना आज तक आ रहे है और कभी-कभी तो लोग फोन भी करते है, जिससे की उनको चाहे-अनचाहे में उनको डिस्टर्ब होना पड़ता था। चौधरीजी इन अनचाहे फोन और मैसेजो से बहुत तंग आ चुके थे। उनके मन में बहुत रंज था। एक बार फिर बिल बनाने वाला बोलाः सरजी आप अपना मोबाईल नम्बर बताये? चौधरीजी नें बहुत ही गुस्से से लाल-पीला होता हुए बोलेः मोबाईल नम्बर के साथ कहो तो मैं अपना वोटर कार्ड, राशन कार्ड और आधार नम्बर भी दे दूँ! चौधरीजी के गुस्सा वाला मूँड़ देखकर बिल बनाने वाला चौधरीजी का मुँह देखने लगा था। चौधरीजी और मैं दोनों सिटी सेंटर से इस नये जमाने का एक दम से नया अनुभव लेकर लौटे थे जहाँ पर कोई भी समान खरीदा तो मोबाईल नम्बर देना पड़ता है और शायद भविष्य में आधार नम्बर भी देना जरूरी हो जाय।
गिरधारी राम, 23.11.2017.
शनिवार, 8 सितंबर 2018
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