गुरुवार, 30 अगस्त 2018

जुनून

ट्रेन में ज्यादा भीड़भाड़ न थी। अभी शाम के सात ही बजे थे विनय अपनी सीट पर लेट कर सोने की कोशिश कर रहा था। अचानक बगल के कंपार्टमेंट से मधुर संगीत गूंज उठा। दस- बारह लोगों का परिवार होगा, सभी अपनी धुन में मग्न थे। कोई गा रहा था तो कोई बजा रहा था।
विनय उठ कर बैठ गया। एक फोक धुन की तान एक लड़की छेड़ रही थी। विनय मंत्र मुग्ध होकर उधर ही देख रहा था। बाउल, भाटियाली, श्यामा, रविंद्र, नजरूल, और आंचलिक फोक संगीत आस-पास बैठे लोगों को आकर्षित कर रहा था। पास बैठें कुछ लोग ताली बजा कर उन सबका मनोबल बढ़ा रहे थे।  अपनी फरमाइशें भी लोग दे रहे थे। घंटों तक यह कार्यक्रम चलता रहा
पीछे से एक आवाज़ आई बंद करो भाई सोने में डिस्टर्ब हो रहा है।
अचानक संगीत का शोर रूक गया। अब कोई गा नहीं रहा था। सभी लोग गुनगुना रहे थे। विनय देख रहा कि ये संगीत की पराकाष्ठा थी जुनून था जिसमें वह परिवार और  कुछ लोग इस कदर मशगूल हो गये कि जिसका कोई अंत न था।
गिरधारी राम, सिलीगुड़ी
दिनांकः 31.01.2018

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