शुक्रवार, 29 मार्च 2019

हमारा कल

रिया, रोहन को हमेशा डॉटती रहती थी. वह बोला करती थी, तुम क्यों बेकार का क्यो अपना टाईम बर्बाद कर रहे हो. दरअसल रोहन एक सामाजिक संगठन "मुक्ति"से जुड़ा हुआ था जो कि अपने परिवार से बिछड़े बच्चों की मदद किया करता था. बहुत सारे बच्चों को इस संगठन की मदद से अपने परिवार से मिलाया था. भिक्षावृत्ति, नशा, यौन शोषण  तथा मानव तस्करी के शिकार बच्चों को इन बुराई से निजात दिलाने में मदद की थी. रोहन सोचा करता था कि हम जो काम कर रहे हैं वह अपने लिए, अपने समाज और अपने देश के लिए कर रहे हैं. यहीं बच्चें तो "हमारा कल" है. रोहन अपनी परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए बहुत दिनों बाद रिया को समझाने मे सफल हो पाया था. अब रिया समझ चुकी थी ये बच्चे अपने बच्चों की तरह ही अपने है, और ये भी हमारा कल है. अब रिया को रोहन पर गर्व हो रहा था.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें